गाय को गौ माता का दर्जा देने वाला पहला राज्य बना- उपमुख्यमन्त्री एकनाथ शिंदे

सरनाईक बने हिन्दु चेतना सम्राट !
सुनील अग्रवाल
*मीरा-भायंदर में भक्ति का सागर; शिवपुराण की कथा ने पूरे शहर को ‘शिवमय’ कर दिया!*
*डिप्टी चीफ मिनिस्टर एकनाथ शिंदे की मौजूदगी; सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की जागृति*
*मीरा-भायंदर :*
इस समय मीरा-भायंदर की पवित्र धरती पर आस्था का एक अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। मौका है दुनिया भर में मशहूर कथावाचक और भगवत भूषण पंडित प्रदीपजी मिश्रा की मधुर वाणी से बह रही ‘शिव महापुराण’ की कथा का। आज कथा का तीसरा दिन है, और पूरा शहर भक्ति के इस सागर में नहा चुका है। ‘हर हर महादेव’ के जयकारों से न सिर्फ इलाका बल्कि हर भक्त का दिल भी शिवमय हो गया है। इस मौके का फायदा उठाते हुए महाराष्ट्र राज्य के डिप्टी चीफ मिनिस्टर माननीय श्री एकनाथ शिंदे आज कथा स्थल पर आए। इस मौके पर उन्होंने मंच पर जाकर पंडित प्रदीपजी मिश्रा का आशीर्वाद लिया और वहां मौजूद लाखों भक्तों का विनम्र अभिवादन स्वीकार किया।
*भक्ति, शक्ति और संस्कार का त्रिवेणी संगम*
24 दिसंबर को शुरू हुआ यह ज्ञान यज्ञ 28 दिसंबर तक लगातार चलेगा। यह सिर्फ एक धार्मिक समारोह नहीं है, बल्कि समाज को दिशा देने वाला, संस्कार देने वाला और आध्यात्मिक चेतना जगाने वाला एक उज्ज्वल अध्याय बन गया है। सनातन परंपरा की शान बढ़ाने वाली इस धर्म सभा की वजह से मीरा-भायंदर में आस्था और सद्भावना की एक नई धारा बहने लगी है।
इस मौके पर भक्तों को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा,
“आज के तेज-तर्रार युग में सनातन धर्म सभाओं का आयोजन समय और समाज की जरूरत है। मुझे यह देखकर खुशी हुई कि पंडित प्रदीप मिश्राजी की अमृतवाणी के जरिए भगवान शिव शंकर के पुराण बहुत ही आसान भाषा में लोगों तक पहुंच रहे हैं। मैं इतनी बड़ी भीड़ के लिए उनकी अनुशासित प्लानिंग के लिए आयोजकों की दिल से तारीफ करता हूं।”
*गाय सेवा और कर्तव्य की भावना*
हिंदू धर्म की रक्षा और गाय माता के सम्मान के बारे में बात करते हुए, डिप्टी चीफ मिनिस्टर एकनाथ शिंदे ने कहा, “महाराष्ट्र एक ऐसा राज्य है जो देश को दिशा देता है। हम गाय माता को ‘राज्यमाता’ का दर्जा देने वाले देश के पहले राज्य बन गए हैं। माननीय मंत्री प्रताप सरनाईक ने धाराशिव में बाढ़ प्रभावित किसानों को 101 गायें बांटकर ‘गोदना’ का जो उदाहरण पेश किया है, वह तारीफ के काबिल है। हर सनातन धर्मी का कर्तव्य है कि वह ऐसी सेवा करे।”
28 दिसंबर तक चलने वाले इस उत्सव में लाखों भक्त हिस्सा ले रहे हैं और इसके ज़रिए शहर में एक अलग आध्यात्मिक ऊर्जा फैल गई है।



